Tuesday, August 25, 2015

मोटिवेशन: सरल जीवन जीना आनंद का मार्ग

                                                           -मिलन  सिन्हा, मोटिवेशनल स्पीकर...
clipकहा जाता है कि सरल ही सुन्दर होता है और सर्वग्राही भी. सरल जीवन जीना आनंद का मार्ग है.  लियो  टॉलस्टॉय कहते हैं , ‘वहां कोई महानता –उत्कृष्टता नहीं हो सकती, जहां सरलता, अच्छाई और सच्चाई नहीं है.' जरा सोचिये, हम जो हैं, उसे हमसे बेहतर कौन जानता है. फिर भी हम जो नहीं हैं उसे दिखाने के चक्कर में स्वयं ही जीवन को सरल मार्ग से जटिलता की ओर ले जाते हैं. तभी तो  कन्फ़्यूशियस का कहना है, ‘जीवन वाकई सरल है, किन्तु हम इसे जटिल बनाने पर आमादा रहते हैं.’ एक कहावत भी हम सभी  वर्षों से सुनते आ रहे हैं, ‘सादा जीवन, उच्च विचार’. देश, विदेश से लेकर अपने आसपास भी कई लोग ऐसे मिल जाते हैं या जिन्हें हम जानते हैं  या जिनके विषय में हम पढ़ते हैं , जो इन बातों के ज्वलंत मिसाल रहे हैं . राष्ट्रपिता  महात्मा  गांधी  से लेकर प्रख्यात वैज्ञानिक अल्बर्ट आइन्स्टीन तक का जीवन देख लें. ऐसे भी, सरलता को छोड़कर  चाहे –अनचाहे  जटिलता को अपनाने में समय, उर्जा एवं  पैसे  की बर्बादी में कौन सी बुद्धिमानी है ? असहजता  और तनाव के  सीधे  रिश्ते से हम अपरिचित  भी तो नहीं हैं , क्यों ?

उदारीकरण के वर्तमान दौर में जब चारों ओर बाजार का प्रभुत्व और जलवा दिखाई पड़ता है, जब विचारों से ज्यादा जानकारी को महत्व दिया जाता है, जब मशीनी श्रम  को मानव श्रम से ज्यादा तबज्जो देने का चलन  है, तब हमारे जैसे देश में समावेशी विकास के लिए इस कथन का विशेष अर्थ है. महात्मा गाँधी कहते हैं, ‘मनुष्य अपने विचारों से निर्मित प्राणी है. वह जो सोचता है, वही बन जाता है.' सोचने वाली बात तो है कि आखिर क्यों देश के आम लोग महात्मा गांधी, जयप्रकाश नारायण, विनोबा भावे या बाबा आम्टे जैसे लोगों को अपने सबसे लोकप्रिय नेताओं में गिनते हैं, जब कि वे न कभी मंत्री, मुख्यमंत्री, प्रधानमंत्री, राज्यपाल, उपराष्ट्रपति या  राष्ट्रपति रहे ? ऐसा इसलिए कि इन्होने न केवल हमेशा विचार के स्तर पर विशिष्टता  प्रदर्शित की जो सर्वथा लोकहितकारी थी, बल्कि अपने  रोजमर्रा की जिंदगी में आचरण के स्तर पर सादगी , सरलता और सदाचार को अंगीकार किया. शानो –शौकत, तामझाम, आडम्बर आदि से इनका कोई रिश्ता नहीं रहा . लिहाजा, ऐसे आचरण वाले नेताओं का चरण स्पर्श करना भी सौभाग्य की बात मानी गयी. इन लोगों ने जहां भी काम किया, जिस वक्त भी काम किया, वहीं एक सकारात्मक परिवर्तन सुनिश्चित किया. इनका व्यवहार आम और खास के लिए अलग –अलग न होकर  एक रूप रहा. इसी  कारण ये निरंतर सबके प्रेरणास्रोत बने रहे . कहना न होगा, ऐसे लोग ही देश के लिए काम करने में खुशी महसूस करते हैं, जिसे सरदार पटेल इन शब्दों में व्यक्त करते हैं, ‘देश की  सेवा करने में जो मिठास है, वह और किसी चीज में नहीं.'  
    
                 और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं

Wednesday, August 12, 2015

'अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस' - 'हमें रोजगार चाहिए'

                                     - मिलन  सिन्हा 
'अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस' के मौके पर  देश -विदेश के सभी युवाओं को हार्दिक शुभकामनाएं ! पढ़ें आगे ....  

....कहना न होगा, किसी देश का भविष्य तभी बेहतर हो सकता है, जब उस देश के युवाओं को बेहतर शिक्षा, ज्ञान , कौशल आदि  के आधार पर सहज व उपयुक्त  रोजगार उपलब्ध हों । लेकिन क्या हम अपने युवाओं के लिए ऐसा करना चाहते हैं और वाकई कर भी रहे हैं? आइये, देखें वस्तुस्थिति क्या है ?

हमारा देश विश्व का सबसे युवा देश  है । भारत दुनिया का ऐसा देश है, जहां युवाओं की संख्या सबसे अधिक है ।  2011 की जनगणना के अनुसार 15 से 29 वर्ष के आयु वर्ग के युवाओं के संख्या 33 करोड़ है, जो देश के कुल आबादी का 27.5 % है ।

गौरतलब  है कि जहां भारत में दुनिया की सबसे बड़ी युवा आबादी रहती है , वहीँ यह भी एक कड़वा सच  है कि दुनिया में सबसे अधिक बेरोजगार युवा भी हमारे देश में हैं । इससे भी अधिक चिंताजनक विषय यह है कि युवाओं में जैसे-जैसे शिक्षा का स्तर बढ़ रहा है,  वैसे- वैसे ही बेरोजगारी की दर भी बढ़ रही है ।

 बिहार, उत्तर प्रदेश जैसे बड़े एवं  राजनीतिक रूप से ज्यादा संवेदनशील, लेकिन औद्योगिक रूप से पिछड़ते जा रहे  राज्यों में यह स्थिति और भी गंभीर है ।  फिर भी क्या इन प्रदेशों के राजनेताओं को वाकई इसकी चिंता है ?

राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण  संगठन द्वारा वर्ष 2009-10 के आंकड़ों के आधार पर जारी रपट के मुताबिक   ग्रामीण क्षेत्र के स्नातक डिग्रीधारी लड़कों  में बेरोजगारी दर 16.6 % और लड़कियों में 30.4 % रही । शहरी क्षेत्रों के ऐसे युवकों में यह  दर 13.8 % और युवतियों में 24.7 % दर्ज की गई । सेकेंडरी लेवल के सर्टिफिकेट धारक  ग्रामीण इलाके के युवकों में बेरोजगारी दर 5 % और लड़कियों  में करीब 7 %   रही, जबकि शहरी क्षेत्रों के युवकों में बेरोजगारी दर 5.9 % और महिलाओं में 20.5 % पाई गई ।

बहरहाल आशा करते हैं, 'जी डी पी' ग्रोथ के साथ रोजगार के अवसर में आने वाले महीनों में उत्साहवर्धक सुधार होंगे .

                  और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं

Tuesday, August 4, 2015

आज की कविता : मोक्ष का मजाक

                                                                                   - मिलन  सिन्हा 
Image result for free photo of persons with shackles, chainsहत्या के आरोप में 
गिरफ्तार 
एक कैदी को 
अपने पिता की मृत्यु पर 
मिलती है इजाजत अदालत से 
पिता के अन्तिम संस्कार हेतु 
आता है कैदी 
घेरे में पुलिस के 
बंधा हुआ मोटी रस्सी से 
देता है चिता को आग 
और 
पूरी करता है अन्य रस्में 
पिता के मोक्ष के लिए 
खुद घोर बंधन में जकड़े हुए !

                 और भी बातें करेंगे, चलते-चलते । असीम शुभकामनाएं